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In the Language of People : Artzindia

Posted By: Divyabh Aryan Times Read: 271

Artzindia  मात्र एक सोच या कोई शैली नहीं है यह एक प्रयास है, जहां स्वयं के हित से बड़ी उस अवधारणा को स्थापित करना है जहां सुदूर गाँव में बैठा आर्टिजन भी अपने काम को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा पाए. www.artzindia.com , ने जब पहली बार ऑनलाइन क्षेत्र में प्रवेश किया तो यहाँ कुछ अजब सा भेड़ चाल मचा था और क्यों न हो, भारत के लिए यह अनुभव बिलकुल नया था जिसने विगत कुछ वर्षों में ही भारतीय बाजार को नई दिशा की तरफ मोड़ दिया किंतु इस आपाधापी में एक महत्वपूर्ण चीज छूट गई और वह थी भारत की परंपरागत शैली ! जिसके तहत न सिर्फ भारत के लाखों-करोड़ों लोगों का घर चलता है वरन कला का वह अंश भी ज़िंदा है जिसका इतिहास हजारों साल पुराना है और सच कहा जाए तो इन हैंडमेड प्रोडक्ट का बाजार बहुत बड़ा है पर उसकी पहुँच काफी सीमित है जिसके कारण न तो आर्टिजन के पास ज्यादा काम आ पाता है और जो बिचौलिए उनके काम को मुख्य बाजार में लाते हैं वहाँ उनके बनाए प्रोडक्ट की कीमत असाधारण हो जाती है और न चाहते हुए भी साधारण परिवार एक अहम कला का हिस्सा बनाने से रह जाता है. इस अनसुलझे पसोपेश से ही www.artzindia.com कि यात्रा शुरू होती है जहां एक तरफ परम्परागत कला का विकास और इसका विस्तार एवं दूसरी तरफ विक्रय का एक वृहत रास्ता भी खुलता है जहां खरीदार एक मंझी हुई विशिष्ट कला का लाभ ले पाता है.



सामान्य रूप में कहा जाए तो www.artzindia.com जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, भारत की कला ! वह प्लेटफार्म है जहां पर भारत की अंतरंग लुप्त होती कला और उसके आर्टिजन को ऐसी दुनिया से परिचित  करवाना है जहां बिना किसी मध्यस्थ के ग्राहक और आर्टीजन को उचित कीमत का लाभ मिल सके, पर यह विन्यास उस कथा के बिना अधूरा है जिसने एक पर्यटक कि आँखों में बिहार कि कला को महसूस किया, वैशाली सेता जिनको बिहार में पर्यटन के नये अध्याय का संस्थापक कहना अतिशयोक्ति न होगी, करीब सात साल पहले मुंबई से चलकर एक फ़िल्म रिसर्च पर काम करने यहाँ आना हुआ तभी पर्यटन के लिए कुछ करने कि जिज्ञासा के तहत ‘बुद्ध’ की सम्पूर्ण यात्रा को एक किताब के माध्यम से इन्होंने प्रस्तुत किया जो बिहार के पर्यटन पर सबसे अनोखा प्रयोग एवं इन्फार्मेशन का विस्तृत संग्रह है. उसी दौरान नालंदा जिले में काम कर रहे कुछ आर्टिजनों से एक मुलाक़ात ने पूरी दिशा ही बदल दी. वहाँ के आर्टिजन बिलकुल प्रतिकूल स्थिति में न सिर्फ जीवन-यापन करने को मजबूर थे वरन उस कला को ज़िंदा रखने के लिए लगातार संघर्ष भी कर रहे थे, दयनीयता का स्तर इसतरह मार्मिक था जहां Artzindia की आवश्यकता को महसूस किया गया जिसने इसकी पृष्ठभूमि तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई पर सवाल कई थे जिनके उत्तर ढूँढने थे, प्रश्न था आखिर बिहार ही क्यों ? बिहार कि आम जनता ने कला को सदा ही उपेक्षा की नज़रों से देखा है जिसका नकारात्मक प्रभाव बहुत गहरे रूप में हुआ है, परिणामस्वरूप यहाँ कि परम्परागत कला या तो लुप्त हो गई या किसी तहखाने में बंद होकर घुटने को मजबूर रही, पर हमारे पर्यटन पर किए विस्तृत अनुभव ने इतना तो सिखला ही दिया था कि शुरुआत कहीं से तो करनी ही पड़ेगी, किसी को तो अपना हाथ बढ़ाना होगा जो नवजागरण फूंक सके.

लम्बी यात्रा, गहन रिसर्च एवं अनेकों परिचर्चाओं के बाद www.artzindia.com का निर्माण शुरू हुआ. पहली चुनौती थी आर्टीजनों के अन्दर उस भरोसे को उत्पन्न करना जो सालों के दोहन में खो चुका था, दूसरी चुनौती थी उत्पाद की गुणवत्ता एवं उसकी विश्वसनीयता खासकर हैंडलूम प्रोडक्टस के सन्दर्भ में चूंकि एक तो यह मार्केट पहले से ही शोषित था और अब इसमें भी प्रारंभिक मुनाफे के लिए मशीन के काम को हैंडमेड के नाम पर ऊँचे दामों में बेचा जा रहा था, तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती थी आर्टीजनों में  कौशल के स्तर को बढ़ाना जहां वह अन्य राज्यों के आर्टिजन एवं कामगारों के साथ प्रतिस्पर्धा कर पायें. इन्हीं तत्वों के आधार पर आर्टजइंडिया का मॉडल तैयार हुआ, जिसका पहला चरण उन आर्टिजन को चिन्हित करने से प्रारंभ हुआ जिनके पास प्रतिभा तो थी पर वे उस बाजार का हिस्सा नहीं थे जिसपर कुछ का कब्जा बना हुआ था. सर्वप्रथम आर्टजइंडिया ने प्रशिक्षण कैंप बनाकर उनकी प्रतिभा को निखारना आरम्भ  किया फिर उनके द्वारा बनाए गए प्रोडक्टस को अपने वेबपेज www.artzindia.com पर लाकर एक बड़े बाजार का रास्ता खोल दिया.

आर्टजइंडिया भारत की पहली ऐसी संस्था है जो “Zero Exploitation” की फिलॉसफी पर काम कर रहा है,  जहां आर्टिजन को उनके काम का पैसा सीधे उनके हाथ में जाता है जिसके कारण सामाजिक स्तर पर दो परिवर्तन दिखने लगे हैं, एक तो उनको बिचौलियों से मुक्ति मिली साथ ही मुख्य धारा में जुड़ने से आत्मविश्वास बढ़ा. इस योजना में एक सीधा चैनल उनसे जुड़ता है, अपनी जरूरतों से अवगत कराता है फिर डिजाइनर अपना डिजाइन उनको देता है जिसके आधार पर प्रोडक्टस निर्माण कि प्रक्रिया आरंभ होती है, प्रथम दृष्टया यह पद्धति बहुत सरल प्रतीत होती है पर यह तो मात्र एकतरफ की चुनौती थी, ठीक दूसरी तरफ खड़े ग्राहक के अन्दर भी प्रोडक्ट की गुणवत्ता को लेकर विश्वास जगाना साथ-ही प्रोडक्टस का प्रस्तुतीकरण, जो मॉडर्न जेनरेशन को भी पसंद आये. इसके लिए आर्टजइंडिया ने कई कदम उठाए चूकि बात सिर्फ काम करवाने या बाजार उपलब्ध होने से ख़त्म नहीं होती, जब हम अपनी दृष्टि थोड़ी पैनी करते हैं तो हमारे समक्ष शाश्वत उपलब्धता का अभाव महसूस होता है, कला को निखारने से पहले उसका संरक्षण जरूरी होता है एवं अगर वह कला और लोगों से अंजान रहे तो वह काल कोठरी में ही अपना दम तोड़ देती है, हमने इस प्रयास में सामूहिक संबद्धता को ज्यादा महत्व दिया जिससे समाज में स्पर्धा आये. इतिहास साक्षी रहा है, रचनात्मकता के लिए एक स्वस्थ स्पर्धा का होना जरूरी होता है तभी वहाँ की कला अपने चरमोत्कर्ष तक जा पाती है. यही कारण है कि आर्टजइंडिया ने सर्वप्रथम स्थानीय लेबल पर बिहार से ही रिसोर्स मैनेजमेंट करना शुरू किया, इस विधा से जुड़े तमाम तरह के लोग जैसे फोटोग्राफर, डिजाइनर, मॉडल आदि को एक प्लेटफार्म लाया गया जिससे रोजगार के नए अवसर विकसित हुए. यह Interdependent पद्धति ही हमारे सिद्धांत का आधार है.

आर्टजइंडिया कि इस यात्रा में वैशाली सेता जो स्वयं तो मुंबई से हैं किंतु वह खुद को बिहार कि बेटी कहलाने में गर्व महसूस करती है के साथ उनके दो पार्टनर श्री अदिति नंदन एवं दिव्याभ आर्यन की भूमिका भी कम नहीं है जहाँ अदिति नंदन एकतरफ आर्टजइंडिया का पूरा मैनेजमेंट संभालते हैं वहीँ दिव्याभ आर्यन कंपनी का सारा क्रिएटिव काम देखते हैं, स्वयं वैशाली सेता जी रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा आर्टीजनों को एकसूत्र में जोड़ने का काम करती हैं.

प्रारम्भिक चरण में www.artzindia.com सिर्फ कुछ क्षेत्रों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहा है, वह है, हैंडलूम की साड़ी जिसमें सभी प्रकार के आर्ट को शामिल किया जा रहा है चाहे वह मधुबनी पेंटिंग हो या मंजुसा आर्ट फिर चाहे टिकुली हो या सूजनी आर्ट; दूसरा क्षेत्र है स्थानीय कपड़ों जैसे तसर, गिच्चा, कटिया, भागलपुरी सिल्क आदि को केंद्र बनाकर महिलाओं के लिए कुर्ती का निर्माण, जिसमें कभी अजरख प्रिंट, कभी ब्लाक प्रिंट तो कभी हैण्ड पेंटिंग के द्वारा विशेष शैली कि कुर्तियाँ बनाई जाती हैं. विशेष प्रकार के बैग आर्टजइंडिया कि अलग विशेषता है जिसमें महिलाओं कि जरूरतों को ध्यान में रखकर विभिन्न प्रकार के लोकल आर्ट को सम्मिलित किया जाता है. आर्टजइंडिया कि एक नई रेंज महिलाओं के लिए प्रिंटिंग जूतों का आने वाला है जिसका काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, हाँ इन सभी में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि प्रोडक्टस प्रकृति के अनुकूल हो और मानव शरीर पर इसका प्रभाव पॉजिटिव रहे.

आर्टजइंडिया का विजन सिर्फ यहीं पर समाप्त नहीं होता. एक तरफ हम सामाजिक संरचना को एकसूत्र में पिरोने का काम कर रहे हैं वहीं समाज के धार्मिक (Religious) पहलुओं को भी छूने का काम जारी है, इस योजना के तहत आर्टजइंडिया प्रोडक्टस के सभी रेंज में आम इंसानों कि धर्म से जुड़ी भावनाओं को एक प्लेटफार्म पर खड़ा करने की मुहिम में जुटा है चाहे वह साड़ी हो या कुर्ती या सजावट कि वस्तु उसमें आस्था का एक रंग जरूर नजर आयेगा.                           

एक आर्टिजन को पता होता है कि उनका प्रोडक्ट ऑनलाइन पर कितने का बेचा जा रहा है.   

 

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